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पानी
जब बात चले ठहरे पानी की
कहीं उथले, कहीं गहरे पानी की
तन से ज्यादा मन को छूतीं
जब उड़ें हवा से लहरें पानी की
कब देखें हमें बड़े लाड़ से और
कब फिर जाएं नजरें पानी की
बस अपनी कहता, नहीं सुनता है ये
करें किससे शिकायत बहरे पानी की
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