जब ना कोई राह मिलेगी
तेरे गम के मारों को,
भर रात बैठकर कोसेंगे
हवा चांद ओर तारों को
लिखकर ऊपर नाम
जिन हाथों भेजा पैगाम
तुम तक आते साल लगेंगे
उन बूढ़े बेदम हरकारो को
नींद उडायी चैन चुराया
दिल को जाने कहॉ छिपाया
जो ढूँढ के ला दें,बुलवा भेजो
ऐसे शातिर एयारों को
लहर उठी पानी से ऐसे
बुला रही थी हम को जैसे
डूब गए कश्ती को लेकर
फेंक दूर पतवारों को
कितना जालिम होता प्यार
कैसे बतलाएं तुम को यार
जैसे कोई हाथ पे रख ले
सुर्ख दहकते अन्गारो को
बडे बडे तुफान रूक जाते
शिखरों के भी सिर झुक जाते
तूती से चुप होते देखा
शोर मचाते नक्कारों को
जो कहे इश्क की दवा नहीं
शायद वो तुमसे मिला नहीं
तुम छू भी लो तो अच्छा कर दो
प्यार से मरते बीमारों को
Sunday, April 29, 2007
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